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गिलहरी की पीठ पर पांच धारियों (लाइनों) का क्या रहस्य है?
( kids stories )
तब पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी वानर वीरों के सहयोग से समुद्र पर पुल बांधने लगे । सभी भालू , बंदर अपनी क्षमता अनुसार छोटे बड़े पत्थर लाकर पुल निर्माण में सहयोग प्रदान कर रहे थे ।( kids stories )
समुद्र के किनारे एक पेड़ पर एक गिलहरी रहती थी । वह भी भगवान श्री रामचंद्र जी के कार्य में हाथ बंटाने के लिए आई (अर्थात सहयोग करने लगी) ।वह गिलहरी समुद्र के पानी में डुबकी लगाती और अपने रोएदार ( बाल युक्त ) शरीर में बालू (रेत) के कण चिपका कर लाती और पुल पर जाकर अपने शरीर को जोर से हिलाती , ताकि वह बालू ( जो उसके शरीर मे चिपका है ) वह पुल पर गिर जाए और पुल मजबूत हो जाए।( kids stories )
उसके कार्य को देखकर भगवान श्री राम के हर्ष की सीमा ना रही। उसके प्रेम को देखकर श्री राम जी ने प्रेम रस से वशीभूत होकर उस गिलहरी को अपनी गोद में उठा लिया और प्यार से सहलाते हुए बोले - तुम नन्ही सी जान हो , ( kids stories ) किंतु तुम्हारे सहयोग की भावना और मेरे प्रति तुम्हारा यह समर्पित प्रेम अतुलनीय है । ( kids stories )संसार में तुम जहां कहीं भी रहोगी , लोग तुम्हें देखकर मुझे याद करेंगे और मेरा परम भक्त मानकर तुम्हें सदैव अच्छी दृष्टि से देखेंगे और धन्य कहेंगे।
लोग कहते हैं जब श्रीराम जी ने उपरोक्त वचन कह कर उस गिलहरी को सहलाया तो उनकी ( राम जी की ) अंगुलियों के निशान धारियों ( लाइनों ) के रूप में अंकित हो गए । तभी से सभी गिलहरियों के शरीर पर निशान बने हैं। ( kids stories ) Read this also
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