पंच महायज्ञ क्या है ?
वेदों को पढ़ना और पढ़ाना ब्रह्मा यज्ञ कहा जाता है। तर्पण पिंडदान और श्राद् को पितृ यज्ञ कहते हैं । देवताओं के पूजन , होम एवं हवन आदि को देव यज्ञ कहते हैं। अपने अन्न से दूसरे प्राणियों के कल्याण हेतु भाग देना भूत यज्ञ कहते हैं । तथा घर आए अतिथि को प्रेम सहित आदर सत्कार करना अतिथि यज्ञ कहते हैं । ब्रह्म यज्ञ , पितृ यज्ञ , देव यज्ञ , भूत यज्ञ, अतिथि यज्ञ इन्हें कोई पंच महायज्ञ कहा जाता है।
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वेदों को पढ़ना और पढ़ाना ब्रह्मा यज्ञ कहा जाता है। तर्पण पिंडदान और श्राद् को पितृ यज्ञ कहते हैं । देवताओं के पूजन , होम एवं हवन आदि को देव यज्ञ कहते हैं। अपने अन्न से दूसरे प्राणियों के कल्याण हेतु भाग देना भूत यज्ञ कहते हैं । तथा घर आए अतिथि को प्रेम सहित आदर सत्कार करना अतिथि यज्ञ कहते हैं । ब्रह्म यज्ञ , पितृ यज्ञ , देव यज्ञ , भूत यज्ञ, अतिथि यज्ञ इन्हें कोई पंच महायज्ञ कहा जाता है।
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